बजट 2023-24

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सामान्य प्रश्न

बजट एक निश्चित अवधि में होने वाली अनुमानित आय और उस अवधि में होने वाले खर्चों का विवरण होता है. बजट एक आम परिवार से लेकर सरकार तक सभी के लिए अहम होता है. और भले ही इनका आकार कैसा भी हो सभी तरह के बजट का उद्देश्य एक ही होता है, जिसमें बजट बनाने वाले आय के व्यवस्थित और सोच समझकर इस्तेमाल के जरिए सभी अहम जरूरतें पूरी करते हुए विकास की राह पर बढ़ने का लक्ष्य रखते हैं. ठोस बजट किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है. इससे सरकार के सभी विभागों को अपनी अपनी योजनाएं बनाने और प्राप्त हुई आय का सबसे अच्छा इस्तेमाल करने में मदद मिलती है.

सरकार बजट में कई तरह के खर्चों का प्रस्ताव रखती हैं. इन खर्चों में कुछ खर्च ऐसे होते हैं जो निवेश श्रेणी के होते हैं और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से आने वाले समय में आय बढ़ाने का साधन बनते हैं. क्योंकि ऐसे निवेश का फायदा मिलने में वक्त लगता है, वहीं इसके लिए खर्च मौजूदा रिसोर्सेज से ही तुरंत शुरू करना होता है इसी वजह से कैपिटल बजटिग की जाती है. जिसमें ये देखा जाता है कि जब प्रोजेक्ट पूरा होगा तो क्या ये किए गए निवेश के मुकाबले फायदेमंद होगा अगर फायदा होगा तो वो कितना मिलेगा. वहीं मौजूदा निवेश की गणना भी की जाती है, कैपिटल बजटिंग की मदद से लंबी अवधि के लक्ष्य तय किए जाते हैं.

शून्य आधारित बजट 1978 में अमेरिका में लागू किया गया था. जिसमें बजट के वर्ष को एक नए वर्ष की तरह माना जाता है और इसकी तैयारी शून्य से होती है. आम तौर पर सामान्य बजट में पिछले बजट को आधार माना जाता है और उसका असर नए बजट पर दिखता है. हालांकि शून्य बजट में न तो पिछले खर्चों पर विचार किया जाता है और न ही पिछले खचों को इसमें एडजस्ट किया जाता है. इस तरह के बजट में नए वर्ष के लिए गणनाएं नए सिरे से शुरू की जाती हैं. भारत में शून्य आधारित बजट 1987-88 में पेश किया गया था.

बजट पेश करने की अपनी परपराएं हैं और इसमें समय समय पर बदलाव किए गए हैं. पहले बजट फरवरी के अंतिम दिन शाम को 5 बजे पेश किया जाता था. 1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिंह ने बजट को सुबह 11 बजे पेश करना शुरू किया. मोदी सरकार के आने के साथ ही इस तारीख को भी बदला गया और बजट पहली फरवरी को पेश किया जाने लगा. इसी परंपरा के अनुसार इस साल भी पहली फरवरी को बजट पेश किया जाएगा. बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को होगी और उस दिन आर्थिक सर्वे पेश होगा.

इस बार कारोबारियों से लेकर आम लोगों को बजट से काफी उम्मीदें हैं. संभावना है कि इस साल मध्यम वर्ग को टैक्स दरों में कुछ राहत मिल सकती है. वहीं वित्त मंत्री पहले ही कह चुकी हैं कि दुनिया भर में मंदी के संकेतों को देखते हुए इस बजट में ग्रोथ को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. ऐसे में कारोबारियों और उद्योगो के लिए ऐलान संभव हैं.

आय व्यय के आधार पर बजट तीन तरह के होते हैं, पहला डेफिसिट बजट होता है जिसमें खर्च आय से भी ज्यादा होते हैं और सरकार कर्ज के जरिए अंतर को पूरा करती है. दूसरी तरह का बजट सरप्लस बजट होता है जिसमें आय के मुकाबले खर्च कम होता है. वहीं तीसरा बजट बैलेंस्ड बजट होता है जहां आय और व्यय दोनों बराबर होते हैं. वहीं उद्देश्य के आधार पर भी बजट के कई प्रकार होते हैं जिसमें परफॉर्मेंस बजटिंग के तहत किसी साल में कार्य के परिणाम के आधार पर अगले साल के बजट तैयार होते हैं. आउटकम बजट में ये देखा जाता है कि किसी योजना या कार्यक्रम के परिणाम उस पर व्यय किए गए धन के मुताबिक हैं या नहीं. इसमें लगातार समीक्षा जारी रहती है. वहीं जेंडर बजटिंग में महिलाओं के लिए खास योजनाओं पर जोर दिया जाता है.