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सबरीमाला मंदिर में आया रिकॉर्ड 351 करोड़ का चढ़ावा, अब भी बचा है सिक्कों का ढेर

सबरीमाला मंदिर में आया रिकॉर्ड 351 करोड़ का चढ़ावा, अब भी बचा है सिक्कों का ढेर

सबरीमाला मंदिर में आया रिकॉर्ड 351 करोड़ का चढ़ावा, अब भी बचा है सिक्कों का ढेर
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By Local 18  Jan 26, 2023 8:20:35 AM IST (Published)

त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष के. अनंत गोपाल के मुताबिक अब तक 351 करोड़ रुपये तक की गिनती पूरी हो चुकी है. फिलहाल गिनती करने वाले कर्मचारियों को आराम दिया गया है. ये गिनती लोगों के जरिए ही पूरी हो सकेगी क्योंकि मशीन से सिक्कों को गिनना मुश्किल है.

मंडलम-मकरविलक्कू तीर्थ यात्रा से तिरुवनंतपुरम स्थित सबरीमाला के प्रसिद्ध अय्यप्पा मंदिर को 351 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ है. अधिकारियों के अनुसार ये मंदिर को मिला अब तक का सबसे ज्यादा सालाना राजस्व है. हालांकि अभी इसे फाइनल नहीं माना जा सकता, क्योंकि मंदिर में सिक्कों की गिनती अब भी जारी है.
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष के. अनंत गोपाल के मुताबिक अब तक 351 करोड़ रुपये तक की गिनती पूरी हो चुकी है. फिलहाल गिनती करने वाले कर्मचारियों को आराम दिया गया है. ये गिनती लोगों के जरिए ही पूरी हो सकेगी क्योंकि मशीन से सिक्कों को गिनना मुश्किल है.
5 फरवरी से सिक्कों की गिनती दोबारा शुरू होगी. बता दें कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड, केरल सरकार से एफिलिएटेड अथॉरिटी है. ये बोर्ड मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है. सिक्कों की गिनती के लिए मंदिर प्रबंधन ने छह सौ कर्मचारियों को काम पर लगाया है.
60 दिनों तक चलती है यात्रा
मंदिर का रेवेन्यू कलेक्शन तो रिकॉर्ड तोड़ ही रहा है इस बीच भक्तों की भीड़ भी बड़ी मात्रा में पहुंच रही है. कोविड से जुड़े प्रतिबंध खत्म होने के बाद इस साल हुई मंडलम-मकरविलक्कू में बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं. ये तीर्थ यात्रा नवंबर से जनवरी तक जारी रहती है. जो कम से कम 60 दिन चलती है.
भक्तों द्वारा मनाया जाने वाले 41 दिन का ये पर्व मंडल कलाम या महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है. ये पर्व मलयालम युग (ME) में वृश्चिकम के महीने से शुरू होता है. इस साल मंडलम उत्सव 17 नवंबर 2022 से शुरू होकर 27 दिसंबर 2022 तक चला. मकरविलक्कु त्योहार 30 दिसंबर 2022 से शुरु हुआ और 14 जनवरी को आई मकरविलक्कु के साथ 20 जनवरी को खत्म हुआ.
प्रसाद की बिक्री से हुई कमाई
ये भी माना जा रहा है कि रेवेन्यू का तीसरा बड़ा हिस्सा प्रसादम की बिक्री से हुआ है. उत्सव के समय मंदिर से अरावना और अप्पम प्रसादम के रूप में दिए जाते हैं. दूसरा बड़ा हिस्सा हुंडी अर्पित करने की परंपरा से अर्जित हुआ है. इस हुंडी में अरावना भरे होते हैं, जो सौ रुपये में प्राप्त की जा सकती है. अधिकारियों के मुताबिक अरावना के मुकाबले अप्पम से काफी कम रेवेन्यू हासिल हुआ है.
अप्पम की हुंडी भी सौ रुपये में मिलती है. इस उत्सव के दौरान औसतन 1 लाख तीर्थ यात्री प्रतिदिन सबरीमाला मंदिर पहुंचे हैं. अनंत गोपाल के मुताबिक इस साल मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे. जिनमें से बीस फीसदी तीर्थ यात्री कम उम्र के यानी बच्चे थे.
सिक्कों का बड़ा हिस्सा अभी बाकी
मंदिर के गर्भगृह में भक्त जो दान अर्पित करते हैं उसे कनिका कहा जाता है. पंपा से पांच किमी की लंबी ट्रेकिंग के बाद भक्त यहां पहुंचते हैं. वो जो कनिका अर्पित करते हैं वो बड़े बड़े वॉल्ट में पहुंचती है. जहां कन्वेयर बेल्ट के जरिए उसकी गिनती होती है. ये भी कहा जा रहा है कि इस बार कन्वेयर बेल्ट में उलझ कर कई नोट फट भी गए. सिक्कों के रूप में मिली कनिका दरअसल करोड़ों रुपये की राशि है. जो अब तक गिनी नहीं जा सकी है. फिलहाल ये सिक्के बड़े स्टोर रूम में रखे गए हैं. जो सिक्कों के बड़े पहाड़ के रूप में नजर आ रहे हैं.
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के बैंकर धनलक्ष्मी बैंक ने नोटों की गिनती के लिए छह छोटी और एक बड़ी मशीन उपलब्ध करवाई है. इसके बावजूद कनिका की गिनती आसान नहीं है क्योंकि बड़ी संख्या में नोट और सिक्कों की बरसात अब भी जारी है. अलग अलग तरह के सिक्कों को देखकर बोर्ड के अधिकारी ये तय करने में लगे हैं कि उन सिक्कों को गिना जाए या तौला जाए.
बड़ी चुनौती ये है कि एक ही डिनोमिनेशन वाले सिक्के भी अलग अलग भार और आकार के हैं. 2019 की एक विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार सिक्कों को तौलने पर कुछ सिक्कों का नुकसान हो सकता है. 2019 में भी कुछ अधिकारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी और गिनती की लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए सिक्कों को तौलने की अनुमति मांगी थी.
मंदिर में अर्पित की जाने वाली कनिका एक छोटे थैले में होती है. जिसमें सिक्के या नोट हो सकते हैं. इसके अलावा पान के पत्ते भी होते हैं. गिनती करने के लिए पहले थैले को खोला जाता है. उसके बाद नोट या सिक्के अलग अलग किए जाते हैं. इस प्रक्रिया मे देरी तो होती ही है नोटों के खराब होने का डर भी होता है. क्योंकि, कनिका में रखे पान के पत्ते सड़ने से नोटों पर भी असर होता है.
12 जनवरी तक कनिका की गिनती 310.40 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई थी. इसके बाद 13 जनवरी को फिर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचे. मकरविलक्कू पर्व के बाद फिलहाल मंदिर 20 जनवरी तक बंद हो गया है. अब मंदिर 12 फरवरी से खुलेगा. जब मलयालम युग में कुंभम माह की शुरुआत होती है और मंदिर में शाम को पूजा की जाती है.

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