होमइकोनॉमीCredit Suisse संकट का भारत के बैंकिंग सिस्टम पर कितना पड़ेगा असर?

Credit Suisse संकट का भारत के बैंकिंग सिस्टम पर कितना पड़ेगा असर?

Credit Suisse संकट का भारत के बैंकिंग सिस्टम पर कितना पड़ेगा असर?
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By HINDICNBCTV18.COMMar 18, 2023 3:19:52 PM IST (Published)

कुछ बैंकों के बंद होने और अन्य ग्लोबल लेंडर्स में तनाव के कारण उत्पन्न स्थिति पर RBI कड़ी नजर रख रहा है.

ग्लोबल स्तर पर बैंकों पर आए संकट से पैनिक जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है. अमेरिका के सिलिकॉन वैली बैंक (Silicon Valley Bank) और सिल्वरगेट बैंक (Silvergate Bank) के बंद होने के बाद अब यूरोपियन बैंक क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) में आए संकट ने दुनियभर की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है. उधर, भारत में इसको लेकर बातें होने लगी हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स की राय है कि क्रेडिट सुइस संकट से भारत के बैंकिंग सिस्टम के प्रभावित होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि भारत में इसकी उपस्थिति बहुत कम है. क्रेडिट सुइस सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) की तुलना में भारत के फाइनेंशियल सिस्टम के लिए ज्यादा रेलिवेंट है, लेकिन जेफरीज इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में इसका संचालन बहुत सीमित है.

RBI की कड़ी नजर
जेफरीज ने कहा कि सिलिकॉन वैली बैंक के फेल होने की तुलना में क्रेडिट सुइस का भविष्य भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है. ज्यूरिख हेडक्वार्टर वाली क्रेडिट सुइस भारत में केवल एक ब्रांच के जरिए ऑपरेट करती है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उम्मीद हैं कि आरबीआई लिक्विडिटी इश्यू पर कड़ी नजर रखेगा, और काउंटर-पार्टी एक्सपोजर और जरूरत के हिसाब से हस्तक्षेप करेगा. इससे इंस्टीट्यूशनल डिपॉजिट बड़े या क्वालिटी वाले बैंकों की ओर अपना रुख कर सकते हैं. कुछ बैंकों के बंद होने और दूसरे ग्लोबल लैंडर्स पर इससे पड़ने वाले तनाव के कारण उत्पन्न स्थिति पर RBI कड़ी नजर रख रहा है.
भारत का बैंकिंग सिस्टम स्थिर
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि ग्लोबल बैंकिंग क्राइसिस से पैदा हुए मुश्किल हालातों के बावजूद भारत की बैंकिंग प्रणाली स्थिर और फ्लेक्सिबल बनी हुई है. दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक लगातार बैंकों के साथ जुड़ा हुआ है और उन्हें रोबस्ट रिस्क मैनेजमेंट प्रैक्टिस को अपनाने, समय-समय पर स्ट्रेस टेस्ट करने और पर्याप्त कैपिटल बफर बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.
भारत के लिए मैक्रो फैक्टर बेहतर
कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और अनुभवी बैंकर उदय कोटक का कहना है कि भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर बेहतर हो रहे हैं और यह इस ग्लोबल फाइनेंशियल उथल-पुथल में खड़े रह सकते हैं. कोटक ने एक ट्वीट में कहा कि भले ही फाइनेंशियल मार्केट में ग्लोबल उथल-पुथल जारी है, भारत के लिए मैक्रो फैक्टर बेहतर हो रहे हैं. FY 23 में करंट अकाउंट डेफिसिट 2.5 प्रतिशत से नीचे और FY 24 में 2 प्रतिशत से नीचे जा रहा है. अगर हम इसी तरह चलते हैं और अच्छी तरह से नेविगेट करते हैं, तो भारत इन मुश्किल हालातों में भी खड़ा रह सकता है.
सऊदी नेशनल बैंक के पास क्रेडिट सुइस का 9.88% हिस्सा
दरअसल, क्रेडिट सुइस के सबसे बड़े शेयर होल्डर सऊदी नेशनल बैंक के यह कहने के बाद कि वह आगे इसका सपोर्ट जारी नहीं रख पाएगा, इसके शेयरों में बुधवार को 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. सऊदी नेशनल बैंक जिसके पास क्रेडिट सुइस का 9.88 प्रतिशत हिस्सा है, ने कहा कि वह नियामक आधार पर और शेयर नहीं खरीदेगा. क्रेडिट सुइस घोटालों से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है जिसने इसके निवेशकों और ग्राहकों के विश्वास को कम कर दिया है.
2008 की वैश्विक मंदी के बाद से क्रेडिट सुइस पहला मेजर ग्लोबल बैंक है जिसे इमरजेंसी लाइफ लाइन दी गई है और इसकी समस्याओं ने इस बात पर संदेह पैदा किया है कि क्या केंद्रीय बैंक आक्रामक ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ महंगाई के खिलाफ अपनी लड़ाई को बनाए रखने में सक्षम होंगे.
SVB के फेल होने से कितना नुकसान?
पीटीआई के मुताबिक, वी फाउंडर सर्कल के को-फाउंडर और सीईओ नीरज त्यागी ने कहा कि क्रेडिट सुइस भी सिलिकॉन वैली बैंक के लिक्विडिटी क्राइसिस को दोहरा सकता है, लेकिन भारत में इसका प्रभाव नहीं होगा क्योंकि घरेलू वित्तीय संस्थान (डोमेस्टिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन) अन्य देशों की तरह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली (इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम) से जुड़े नहीं हैं. सिलिकॉन वैली बैंक के पतन को 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से सबसे बड़ा रिटेल बैंकिंग क्राइसिस करार दिया गया है. सिलिकॉन वैली बैंक के ग्राहकों में कुछ बड़े टेक्नोलॉजी स्टार्टअप शामिल हैं. इस बैंक के फेल होने के चलते इसे लगभग 2 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है.
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