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बढ़ती आबादी के बीच कैसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत

बढ़ती आबादी के बीच कैसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत

बढ़ती आबादी के बीच कैसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत
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By HINDICNBCTV18.COMJan 24, 2023 12:03:56 PM IST (Published)

विश्व की जनसंख्या फिलहाल 8 बिलियन से ज्यादा है और इस बीच उम्मीद की जा रही है कि भारत 2030 तक चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा. भारत में लाइफ एक्सपेंटेन्सी (life expectancy) में हो रहे निरंतर सुधार से इसकी संभावनाएं और बढ़ गई हैं.

भारत भले ही अभी तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह 2037 तक इस मुकाम को हासिल कर लेगा. 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य भले ही महामारी के चलते थोड़ा पटरी से उतर गया है, लेकिन सरकार ने 2035 तक इसे 10 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.देश की आबादी भी फिलहाल बहुत तेजी से बढ़ रही है.
विश्व की जनसंख्या फिलहाल 8 बिलियन से ज्यादा है और इस बीच उम्मीद की जा रही है कि भारत 2030 तक चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा. भारत में लाइफ एक्सपेंटेन्सी (life expectancy) में हो रहे निरंतर सुधार से इसकी संभावनाएं और बढ़ गई हैं.
दिलचस्प बात यह है कि दो अरब से अधिक देशों की आबादी बनाम अन्य देशों की आबादी के बीच काफी बड़ा अंतर है. इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर आने वाले अमेरिका की आबादी 339 मिलियन है, जो चीन और भारत दोनों की आबादी से लगभग एक अरब कम है.
बढ़ती हुई जनसंख्या का अर्थव्यवस्था
जनसंख्या एक महत्वपूर्ण फैक्टर है जिसे भारत की प्रगति का मूल्यांकन करते समय ध्यान में रखना जरूरी है. इकोनॉमिक ग्रोथ एक राष्ट्र और उसके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण चीज है और जनसंख्या में तेज बढ़ोतरी इसे प्रभावित कर सकती है.
मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) एक मीट्रिक है जिसका इस्तेमाल किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है. इसके अनुसार ज्यादा मानव पूंजी (Human capital) होने के चलते चीन और भारत ज्यादा ग्रोथ नहीं कर पा रहे हैं. अमेरिका में एक व्यक्ति की प्रति व्यक्ति आय (per capita income) लगभग 65,000 डॉलर है, जबकि एक चीन में यह 17,500 डॉलर और एक भारतीय के लिए सिर्फ 6,600 डॉलर है.
इसके अलावा अमेरिका में स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष 16.3 वर्ष, चीन में 14.2 वर्ष और भारत में 11.9 वर्ष हैं. एक भारतीय की 67 साल की लाइफ एक्सपेंटेन्सी भी अमेरिका और चीन दोनों की तुलना में 10 साल कम है. भारत एचडीआई में 132वें वहीं चीन 79वें स्थान पर है. आर्थिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी मुल्क श्रीलंका की स्थिति भी इस इंडेक्स में भारत से बेहतर है और वह इस लिस्ट में 73 वें स्थान पर है.
देश
प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय
जन्म के समय लाइफ एक्सपेंटेन्सी
स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष
स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष
HDI Rank
चीन17504 डॉलर78.2 साल14.2 साल7.6 साल79
भारत6590 डॉलर67.2 साल11.9 साल6.7 साल132
कहां से आएगी जमीन
इकोनॉमिक्स में प्रोडक्शन के महत्वपूर्ण फैक्टर्स में से एक है जमीन. भारत में प्रति व्यक्ति केवल 0.002 वर्ग किलोमीटर या प्रति 1,000 लोगों पर 2.33 वर्ग किलोमीटर जमीन आती है. यह चीन के 6.84 वर्ग किलोमीटर के मुकाबले खराब एवं ब्राजील के 39.5 वर्ग किलोमीटर और अमेरिका के 118 वर्ग किलोमीटर के साथ बेहद ही खराब है. भारत के पास जमीन लिमिटेड है यानि कि देश में जनसंख्या वृद्धि के साथ इसे और भी ज्यादा लोगों के बीच विभाजित करने की जरूरत पड़ेगी.
इस बीच जनसंख्या प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन के बीच में आ सकती है. भारत को फिलहाल प्रति वर्ग किलोमीटर उच्च आर्थिक मूल्य देने वाले सेक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए. इसके अलावा, यह मीट्रिक बताता है कि घर की जरूरतों को देखते हुए देश में जमीन की मजबूत मांग बनी रहने की संभावना है.
ऑटोमोबाइल सेक्टर का पहिया?
किसी देश के लोग कितने समृद्ध हैं इसका अंदाजा उनकी चल और अचल संपत्ति से भी लगाया जा सकता है. इस लिस्ट में एक मुख्य एसेट मोटर व्हीकल है. भारत में प्रति 1000 लोगों पर लगभग 59 मोटर वाहन हैं, जबकि चीन में यह आंकड़ा 221 वहीं अमेरिका में 890 है.
जबकि कुछ इसे एक संभावित अवसर के रूप में देख सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि देश में बहुत से लोग इसे वहन नहीं कर सकते हैं. इसलिए यदि भारत की तिगुनी जीडीपी इस संख्या को केवल तीन गुना तक ले जाती है, तब भी देश 'प्रति व्यक्ति' के मामले में चार्ट पर जगह नहीं बना पाएगा.

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