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टैक्स रिफंड नियम को लेकर हुआ बड़ा बदलाव, जानिए कैसे होगा आपको फायदा

टैक्स रिफंड नियम को लेकर हुआ बड़ा बदलाव, जानिए कैसे होगा आपको फायदा

टैक्स रिफंड नियम को लेकर हुआ बड़ा बदलाव, जानिए कैसे होगा आपको फायदा
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By HINDICNBCTV18.COMDec 4, 2022 5:12:48 PM IST (Published)

टैक्स अधिकारियों के लिए रिफंड एडजस्टमेंट पर फैसले की समयसीमा को घटाकर 21 दिन कर दिया गया है. टैक्सपेयर के पैन कार्ड पर पहले के बकाये के बारे में टैक्स विभाग की ओर से नोटिस के जरिए जानकारी दी जाती है. टैक्सपेयर के पास इस बकाये से सहमत होकर पेमेंट करने या असहमत होने का अधिकार होता है.

टैक्स से जुड़े मुकदमे को कम करने के उद्देश्य से टैक्स अधिकारियों के लिए रिफंड एडजस्टमेंट पर फैसले की समयसीमा को 30 दिन से घटाकर 21 दिन कर दिया गया है. टैक्स विभाग की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि अगर कोई टैक्सपेयर रिफंड एडजस्टमेंट नहीं करना चाहता है या आंशिक एडजस्टमेंट करना चाहता है तो इस मामले को CPC की ओर से सीधे टैक्स अधिकारी को भेजा जाएगा. इसके बाद टैक्स अधिकारी के पास फैसले के लिए तय समयसीमा होगी. मामला रेफर किए जाने से लेकर 21 दिनों के अंदर उन्हें फैसला लेना होगा.
टैक्स विभाग को टैक्सपेयर के पैन पर टैक्स बकाये की जानकारी होती है. इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 245 के तहत एसेसिंग ऑफिसर के पास रिफंड एडजस्ट करने का अधिकार होता है. ये एडजस्ट पहले के टैक्स बकाये को लेकर होता है.
ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए बकाया टैक्स जमा करने का विकल्प
टैक्सपेयर को बकाया रकम एडजस्ट करने के बारे में टैक्स विभाग को जानकारी देनी होगी. टैक्सपेयर बकाये टैक्स का भुगतान ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए कर सकते हैं. टैक्सपेयर के पास बकाया रकम जमा करने से असहमत होने का भी अधिकार होता है. अगर कोई टैक्सपेयर टैक्स विभाग की नोटिस का जवाब नहीं देता है तो उनके पैन पर टैक्स बकाये पर उनकी स्वीकृती मानकर इसे एडजस्ट कर दिया जाएगा.
कैसे जमा कर सकते हैं बकाया टैक्स
टैक्स पेयर के पास ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए टैक्स बकाये के बारे में पता करने की सुविधा होती है. इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट के अनुसार, पेंडिंग डिमांड पता करने के लिए टैक्सपेयर को ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद Pending Actions पर क्लिक करना होगा. इसके बाद Reponse to Outstanding Demand पर जाना होगा. अगर उनके पैन पर कोई बकाया है तो इसके बारे में उन्हें जानकारी मिल जाएगी.
यहां पर उनके पास बकाया जमा करने या अपना रिस्पॉन्स सबमिट करने का भी विकल्प होता है. टैक्सपेयर को रजिस्टर्ड ई-मेल या मोबाइल नंबर के जरिए भी इसकी जानकारी मिलती है. अगर कोई टैक्सपेयर बकाये को लेकर असहमत है तो उनके पास कई कारणों की लिस्ट में अपना कारण चुनने का भी विकल्प मिलता है.
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