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NFO या IPO किस में मिलेगा ज्यादा कमाई का मौका?

NFO या IPO किस में मिलेगा ज्यादा कमाई का मौका?

NFO या IPO किस में मिलेगा ज्यादा कमाई का मौका?
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By HINDICNBCTV18.COMDec 5, 2022 8:53:14 AM IST (Updated)

अक्सर निवेशक ये मान लेते हैं कि दोनों एक ही जैसे इंवेस्टमेंट का मौका देते हैं. साथ ही दोनों को प्राइमरी मार्केट ऑफरिंग भी मान लिया जाता है. इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि निवेश से पहले NFO और IPO दोनों के अंतर को समझ लिया जाए और दोनों के फायदे नुकसान भी जान लिए जाएं.

किसी भी फंड में निवेश करने से पहले इन्वेस्टर बाजार को पूरी तरह खंगालता है. फिर भी कुछ टेक्निकल टर्म ऐसे होते हैं कि निवेशक भी कंफ्यूज हो जाते हैं. ऐसे ही दो टेक्निकल टर्म - एक है IPO और दूसरा है NFO. IPO यानी कि Initial Public Offering और NFS यानी New Fund Offer है. अक्सर निवेशक ये मान लेते हैं कि दोनों एक ही जैसे इंवेस्टमेंट का मौका देते हैं. साथ ही दोनों को प्राइमरी मार्केट ऑफरिंग भी मान लिया जाता है. इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि निवेश से पहले NFO और IPO दोनों के अंतर को समझ लिया जाए और दोनों के फायदे नुकसान भी जान लिए जाएं.
IPO और NFO में अंतर
पिछले कुछ समय में बड़े-बड़े ब्रांड्स अपना IPO लेकर आई हैं. इसके जरिए फर्म्स अपने रिटेलर्स को अपने शेयर खरीदने का मौका देते हैं. NFO के जरिए कोई भी एसेट मैनेजमेंट कंपनी नई स्कीम लॉन्च करती है. दोनों में बेसिक अंतर ये है कि कंपनी जब अपने कारोबार का विस्तार करती है तो आईपीओ जारी कर बाजार से पैसा जुटाती है. जबकि एनएफओ में निवेशकों से पैसा जुटाकर फंड हाउस उसे सिक्योरिटी में इंवेस्ट करते हैं.
IPO और NFO में समानता
दोनों ही स्कीम्स में कुछ अंतर हैं तो कुछ समानताएं भी हैं. ये दोनों ही कारोबार विस्तार के लिए पब्लिक से फंड रेज करते हैं. दोनों ही एक तय समय पर सब्सक्रिप्शन ऑफर करते हैं. हालांकि आईपीओ की तुलना में एनएफओ ज्यादा समय के लिए खुले रहते हैं. दोनों की ही मॉनिटरिंग सेबी (SEBI) खुद करता है. जब बाजार अपनी पीक पर होता है तब दोनों ही बेहतर रिटर्न देते हैं.
किस में निवेश करना है सही?
वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में जरूरत महसूस हो तभी इनमें निवेश किया जाना चाहिए. खासतौर से एनएफओ में निवेश से पहले उन्हें कुछ खास बातें जरूर समझ लेनी चाहिए. अगर उनके पास कोई थीम है जिस पर फोकस कर वो आगे बढ़ रहे हैं तो ही एनएफओ में निवेश करें.
जिस तरह एक आईपीओ स्टॉक से संबंध रखता है उसी तरह एनएफओ का म्यूचुअल फंड से जुड़ा रहता है. अगर आपके फंड ऑब्जेक्टिव क्लीयर हैं और रिस्क लेवल से वाकिफ हैं तो दोनों में से किसी भी फंड में निवेश कर सकते हैं.
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