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शेयर बाजार से म्यूचुअल फंड का क्या रिश्ता है? आसान शब्दों में जानिए

personal finance | IST

शेयर बाजार से म्यूचुअल फंड का क्या रिश्ता है? आसान शब्दों में जानिए

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ये सभी फैक्टर्स व्यक्तिगत स्टॉक के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं, जिससे उसके अंतर्गत आने वाले म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन पर भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि म्यूचुअल फंड द्वारा जनता से जुटाए गए पैसे को शेयर मार्किट में ही इनवेस्ट किया जाता है.

"म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिम के अधीन हैं. कृपया निवेश करने से पहले ऑफर दस्तावेज को ध्यान से पढ़ें”- इस डिस्क्लेमर से हम सभी अच्छी तरह से परिचित हैं. किसी भी माध्यम (इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, डिजिटल) से जब निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है तो यह डिस्क्लेमर वहां जरूर होता है.
दरअसल, यह डिस्क्लेमर निवेशकों या आम जनता को एक वैधानिक चेतावनी है कि उनके निवेश पर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है क्योंकि म्यूचुअल फंड भी स्टॉक मार्केट के उतार-चढाव पर ही काम करता है और कुछ हद तक जोखिम हमेशा प्रत्येक फंड से जुड़ा रहता है.
शेयर बाजार के बिना म्युचूअल फंड हो ही नहीं सकता है. क्योंकि म्युचूअल फंड्स मैनेजर 95 फीसदी रकम शेयर बाजार में ही पैसा लगाकर निवेशकों को रिटर्न देते है. इसीलिए दोनों एक दूसरे के साथ है. अगर शेयर बाजार में गिरावट आती है तो फंड्स में पैसा लगाने वालों के रिटर्न पर असर साफ दिखता है. इसी तरह अगर तेजी आती है तो पैसा भी तेज रफ्तार से बढ़ता है.
मार्केट रिस्क क्या हैं
मार्केट रिस्क या बाजार जोखिम ब्याज दर में बदलाव, मुद्रा में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव (जैसे कच्चे तेल, कीमती धातु, आदि), भू-राजनीतिक (geopolitical risk) पर निर्भर करता है. ये सभी फैक्टर्स व्यक्तिगत स्टॉक के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं, जिससे उसके अंतर्गत आने वाले म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन पर भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि म्यूचुअल फंड द्वारा जनता से जुटाए गए पैसे को शेयर मार्किट में ही इनवेस्ट किया जाता है.
बता दें, यदि कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है, तो कच्चे माल के रूप में कच्चे तेल का उपयोग करने वाली कंपनियों के लाभ पर प्रभाव दिखाई देगा, जिससे उसके प्रदर्शन में कमी आएगी और उसकी मार्केट वैल्यू में भी गिरावट की संभावना बढ़ जाएगी.
म्यूचुअल फंड कैसे बाजार जोखिम के अधीन हैं
म्यूचुअल फंड बाजार जोखिमों के इसलिए अधीन हैं क्योंकि इसके माध्यम से फंड मैनेजर विभिन्न फाइनेंशियल स्कीम्स जैसे इक्विटी, डेट, कॉरपोरेट बांड में निवेश करते हैं, जहां कई फैक्टर्स इसकी परफॉरमेंस को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें मार्केट का उतार-चढाव मुख्य है. कीमत में उतार-चढ़ाव या अस्थिरता के कारण किसी व्यक्ति की नेट एसेट वैल्यू घट जाती है, जिसके चलते उसे नुकसान हो सकता है.
बता दें, NAV स्कीम द्वारा आधारित सिक्योरिटीज का बाजार मूल्य है. म्यूचुअल फंड द्वारा निवेशकों से इकठ्ठा किए गए पैसे से शेयर बाजार में निवेश किया जाता हैं, जहां बाजार मूल्य हर दिन बदलता है, इसलिए किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम का NAV भी दिन-प्रतिदिन बदलता रहता है.
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