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म्यूचुअल फंड और एसआईपी में क्या अंतर है? जानिए जवाब और सभी काम की बातें

म्यूचुअल फंड और एसआईपी में क्या अंतर है? जानिए जवाब और सभी काम की बातें

म्यूचुअल फंड और एसआईपी में क्या अंतर है? जानिए जवाब और सभी काम की बातें
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By HINDICNBCTV18.COMDec 3, 2022 2:53:52 PM IST (Published)

Mutual Fund Pathshala- सोशल मीडिया पर बहुत सारे लोगों ने एक सवाल पूछा है कि म्यूचुअल फंड और एसआईपी में क्या अंतर है? इसीलिए हम आपको इसकी विस्तार से जानकारी दे रहे है.

सबसे पहले म्यूचुअल फंड की बात करते हैं. अगर आसान शब्दों में कहें तो देश की वो बड़ी-बड़ी कंपनियां, जिनके पास म्यूचुअल फंड का लाइसेंस होता है. वो एक फंड मैनेजर को नियुक्त करती है. ये फंड मैनेजर आपके म्युचूअल फंड में जमा पैसों को शेयर बाजार, बॉन्ड मार्केट और कई अन्य प्रोडक्ट में लगाते है. उससे जो रिटर्न मिलता है उसे वो निवेशकों के साथ शेयर करते हैं. जबकि, एसआईपी यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान होता है. ये म्यूचुअल फंड का एक हिस्सा है. ये अलग से कोई फाइनेंशियल प्रोडक्ट नहीं है.
एसआईपी के बारे में जानिए-
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) म्यूचुअल फंड द्वारा दिया जाने वाला एक निवेश का तरीका है, जिसमें कोई भी व्यक्ति पहले से तय रकम को हर महीने लगाते हैं. यह निवेश तिमाही, 6 महीने में एक बार होता है. यह निवेश 500 रुपये की न्यूनतम रकम के साथ शुरू किया जा सकता है.यह सुविधाजनक भी है क्योंकि इसमें एक तय राशि हर महीने आपके बैंक खाते से सीधे फंड में ट्रांसफर होती रहती है.जबकि म्युचूअल फंड की सामान्य स्कीम में एक बार में पूरा पैसा लगा दिया जाता है.
हमने अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना है कि ‘बूंद-बूंद से सागर बनता है.’ SIP भी इसी थ्योरी पर काम करती है. यह एक ऐसा ऑप्शन है. इस प्रकार कुछ समय के बाद आप एक बड़ी रकम जुटा सकते हैं.
उदाहरण के तौर पर समझने के लिए मान लीजिए कि आप लोन लेना चाहते हैं. आप घर या कार खरीदने के लिए लोन ले रहे हैं और इसके लिए आवेदन किया है.
इस तरह के खर्च के लिए हम बचत नहीं कर पाते हैं. लेकिन, जब हम लोन ले लेते हैं तो एक नियमित समय पर इसका रिपेमेंट करते रहते हैं. लोन के लिए EMI की रकम बहुत कम होती है.
लेकिन लोन के लिए हमें मूल रकम के अलावा ब्याज का भी भुगतान करना होता है. इससे आप समझ सकते हैं कि SIP और लोन में केवल यह अंतर है कि लोन लेने पर आपको ब्याज की रकम चुकानी होती है. जबकि, SIP में निवेश कर आप भविष्य के लिए एक बड़ी रकम तैयार कर सकते हैं.
एसआईपी कैसे काम करती है-एसआईपी म्यूचुअल फंड में निवेश करना बहुत ही आसान है. जब आप एक या अधिक एसआईपी योजनाओं के लिए आवेदन करते हैं, तो आपका पैसा आपके बैंक खाते से हर महीने या फिर तिमाही और छमाही आधार पर खुद कद जाते है. जिससे आपके द्वारा खरीदे गए म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है. आपके फंड के एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) के आधार पर, आपको दिन के अंत में एक निश्चित संख्या में यूनिट दी जाती हैं. स्टॉक मार्केट में निवेश करने के लिए निवेशकों को मार्केट टाइमिंग के विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं है. यूनिट्स को विभिन्न दरों पर खरीदा जाता है. जब कीमतें अधिक होती हैं, तो निवेशक अधिक यूनिट्स खरीदते हैं, लेकिन जब कीमतें कम होती हैं, तो निवेशक कम यूनिट्स खरीदते हैं.
एसआईपी निवेश के फायदे
जब आप एसआईपी के माध्यम से लंबी अवधि के लिए नियमित रूप से निवेश करते हैं, तो चक्रवृद्धि प्रभाव से लाभ बढ़ जाता है. चक्रवृद्धि प्रभाव सुनिश्चित करता है कि आप न केवल अपनी मूल राशि (वास्तविक निवेश) पर बल्कि मूल राशि के लाभ पर भी लाभ अर्जित करते हैं यानि कि आपका पैसा समय के साथ बढ़ता है क्योंकि आपके द्वारा निवेश किए गए धन पर आपको रिटर्न मिलता है.
शेयर बाजार में अक्सर ही भाव उतरते-चढ़ते रहते है, इसलिए, यह समझना अक्सर मुश्किल होता है कि निवेश करने का सबसे अच्छा समय क्या है और क्या नहीं. रुपया-लागत औसत (Rupee-Cost Averaging) निवेशकों को इस समस्या से छुटकारा पाने में मदद करता है. यह आपके निवेश किए गए पैसों से कीमत अधिक होने पर कम यूनिट्स और कीमत कम होने पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने में मदद करता है.
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