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Business Idea : भिंडी की खेती से किसान कर सकते हैं लाखों में कमाई

Business Idea : भिंडी की खेती से किसान कर सकते हैं लाखों में कमाई
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By Local 18  Feb 16, 2023 11:47:39 AM IST (Updated)

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SUMMARY

किसान फरवरी व मार्च के महीने में अगेती भिंडी की खेती को वैज्ञानिक तकनीक से करके बेहतर उत्पादन और बेहतर मुनाफा दोनों कमा कर सकते है

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किसान फरवरी व मार्च के महीने में अगेती भिंडी की खेती को वैज्ञानिक तकनीक से करके बेहतर उत्पादन और बेहतर मुनाफा दोनों कमा कर सकते है. इस संबंध में डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्व विद्यालय पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के कृषि वैज्ञानिक सह हेड डॉ. आर के तिवारी ने बताया कि किसान मौजूदा समय में भिंडी की फसल अपने खेत में लगाकर बेहतर उत्पादन के साथ-साथ बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.वैज्ञानिक ने लोकल 18 को बताया कि भिंडी उत्पादक किसानों को पहले भिंडी तोड़ने में हाथ नोचने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था. लेकिन अब बेहद कम कीमत में भिंडी तोड़ने वाली छोटी मशीन विकसित होने के बाद किसानों की यह समस्या भी अब दूर हो गई हैं.

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मौजूदा समय भिंडी का अगली फसल होती है और इस दौरान बाजारों में भिंडी की डिमांड होने के साथ-साथ किसानों को अच्छी कीमत मिलती है. लाल भिंडी को लगाने में ज्यादा लागत नहीं आती है। लाल भिंडी की कीमत 500 रुपये किलो तक आसानी से बिक जाती है. कभी-कभी इसके दाम 800 रुपये किलो तक पहुंच जाते हैं. एक एकड़ में करीब 40 से 50 क्विंटल तक उत्पादन हो सकता है. ऐसे में लाल भिंडी की खेती से मोटी कमाई कर सकते हैं.

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खासतौर पर किसान दो सीजन में भिंडी की फसल को लगाते है. गरमा यानी भिंडी के अगेती फसल की बुआई किसान अभी कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि भिंडी से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए गर्म मौसम ही ज्यादा बेहतर होता है. कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि बिहार के किसान पूसा भिंडी 5, काशी लालिमा, अर्का, अनामिका आदि जैसी प्रजातियों के भिंडी को लगाकर बेहतर से बेहतर उत्पादन प्राप्त करते है. उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में विकसित हुई भिंडी की प्रजाति पूसा भिंडी 5 काफी बेहतर प्रजाति हैं. इसमें दो, तीन या इससे भी अधिक कल्ले निकलते है जिससे उत्पादन बढ़ जाता हैं.

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बताया जाता है कि ऐसे तो भिंडी में कोई खास तरह की बीमारी नही लगती है. लेकिन इसमें लगने वाली बीमारी येलो भेन मोजायक वायरस काफी मुख्य और काफी खतरनाक है. इस बीमारी में पत्तियों पर पीले पीले धब्बे बन जाते है. तथा संक्रमण जब रफ्तार पकड़ता है, तो पौधें धीरे धीरे मर जाते है. उन्होंने बताया कि चूंकि यह बीमारी एक वायरस है, इसलिए इसका कोई खास दवाई उपलब्ध नही है.

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कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि भिंडी की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी काफी उत्तम मानी जाती है. जिससे फसल अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का पीएच मान 6 से 6.8 के बीच होना जरूरी होता है. किसान भिंडी लगाने से पहले खेत की 3 से 4 बार अच्छी से जुताई कराकर मिट्टी को भुरभुरा बना दें तथा पाटा चलाकर उसे समतल कर दें. उन्होंने बताया कि भिंडी लगाने वाले एक हेक्टेयर खेत में 200 से 250 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद, 120 से 150 किलों नाइट्रोजन खाद, 50 से 60 किलो फॉस्फोरस और पोटेशियम खाद देने की जरूरत होती है.

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गर्मी के दिनों में लगाएं जाने वाले भिंडी के बीज को किसान 45 सेंटीमीटर और लाइन से लाइन 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं. उन्होंने कहा कि केवीके बिरौली के द्वारा आसपास के किसानों से भिंडी की नई प्रजाति काशी लालिमा की खेती करवाने के लिए उन्हें दो वर्षों से इसके बीज उपलब्ध कराएं जा रहे हैं. काशी लालिमा भिंडी का पौधा और फल दोनों लाल रंग का होता है. इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता हरी भिंडी से अधिक होती है. किसान इस भिंडी को लगाकर अधिक रेट और मुनाफा दोनों प्राप्त कर सकते हैं.

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