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बी.ए. मैकेनिकल की पढ़ाई के बाद लिया शैवाल की खेती करने का फैसला, आज लाखों में कमाई

बी.ए. मैकेनिकल की पढ़ाई के बाद लिया शैवाल की खेती करने का फैसला, आज लाखों में कमाई

बी.ए. मैकेनिकल की पढ़ाई के बाद लिया शैवाल की खेती करने का फैसला, आज लाखों में कमाई
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By Local 18  Jan 23, 2023 3:30:36 PM IST (Updated)

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SUMMARY

Seaweed cultivation: सिद्धांत जाधव ने समुद्री शैवाल की खेती का सफल प्रयोग किया है. शैवाल की खेती किसी भी मौसम में बहुत ही कम लागत में अत्यधिक उत्पादक होती है.

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युवाओं का रुझान पढाई के बाद नौकरी पाने की ओर अधिक रहता है. हालांकि इन धारणाओं को तोड़ते हुए संगति इस्लामपुर के एक युवक ने खेती करने का फैसला किया. इस युवा किसान का नाम सिद्धांत जाधव है.

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सिद्धांत ने समुद्री शैवाल की खेती का सफल प्रयोग किया है. शैवाल की खेती किसी भी मौसम में बहुत ही कम लागत में अत्यधिक उत्पादक होती है. सिद्धांत ने 6 साल पहले जमीन के एक टुकड़े में इस फार्म की शुरुआत की थी.

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शैवाल पाउडर का उपयोग भोजन के पूरक के रूप में किया जाता है. वे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्पिरुलिना टैबलेट बनाने और बेचने का अपना व्यवसाय भी कर रहे हैं. कोरोना के संकट के बाद हर स्तर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के प्रयास देखने को मिल रहे हैं.

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स्पिरुलिना की मांग सबसे अधिक औषधीय खाद्य पूरकों में से एक के रूप में बढ़ रही है. स्पुरुलिना का अर्थ है शैवाल. इसलिए इस समुद्री शैवाल की खेती को अब और अधिक महत्व मिल रहा है. सिद्धांत जाधव बी.ए. मैकेनिकल हैं.

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अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के दौरान, उनका लक्ष्य नौकरी के बजाय उद्योग को आगे बढ़ाना था. एक व्यवसाय की तलाश करते समय सिद्धांत जाधव को एक मित्र द्वारा समुद्री शैवाल की खेती के बारे में बताया गया.

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सिद्धांत ने फिर जानकारी जुटानी शुरू की. इसके लिए उन्होंने पांडिचेरी, केरल और अहमदनगर, महाराष्ट्र में शैवाल की खेती का दौरा किया. इसके बाद उन्होंने अपने एक प्लॉट में समुद्री शैवाल की खेती का प्रयोग किया. सिद्धांत का कहना है कि उस समय मुख्य समस्या उत्पादित शैवाल के मार्केटिंग की थी.

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आज सिद्धांत खुद अपनी गीता-मारुति (जीएम) स्पिरुलिना टैबलेट बनाता है. ये टैबलेट बाजार में उपलब्ध हैं और अच्छी मांग में हैं. सिद्धांत का कहना है ''हमारे पास एक गुंटा स्थान में चार टैंक हैं.

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एक टैंक 10 बाय 25 फीट लंबाई-चौड़ाई और डेढ़ फीट गहराई का है.'' शैवाल का उत्पादन पूरी तरह से बंद शेड में किया जाता है, जिसमें पारदर्शी शीट और प्रत्येक टैंक पर केवल सूर्य के प्रकाश की अनुमति देने के लिए जाली लगाई जाती है.

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कृषि मुख्य रूप से सूर्य के प्रकाश पर पनपती है, लेकिन बहुत अधिक धूप भी खतरनाक है. इसलिए, सिद्धांत कहता है कि शैवाल की खेती के उत्पादन के लिए पर्याप्त प्रकाश जोखिम फायदेमंद है.

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